Rakshabandhan 2023 Date & Time: रक्षाबंधन 2023 के बारे में सारी जानकारी

Rakshabandhan 2023

Rakshabandhan 2023 Date & Time: रक्षाबंधन 2023 के बारे में सारी जानकारी

इस साल 2023 में अगस्त में सावन के साथ-साथ अधिक मास का संयोग बना हुआ है। इस साल सावन पूरे दो महीने का है। जो 4जुलाई से शुरू होकर 31 अगस्त तक चलेगा। इस वर्ष सावन के दो महीने तक चलने का मुख्य कारण यह है कि इस साल अधिकमास भी लगा हुआ है। आपको यह भी बता दें कि सावन के साथ वाले अधिकमास में भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु की भी पूजा करना बहुत ही फलदायी सिद्व होता है।

Rakshabandhan 2023 Date & Time: व्रत एवं त्यौहारः

अगस्त का महीना व्रत एवं त्यौहार में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है और इस बार तो अगस्त माह की शुरूआत अधिकमास की पूर्णिमा के साथ हुयी है।

1 अगस्त 2023 अधिकमास पूर्णिमा व्रत, मंगला गौरी व्रत
2 अगस्त 2023 पंचक शुरू
7 अगस्त 2023 सावन सोमवार
8 अगस्त 2023 मंगला गौरी व्रत, कालाष्टमी
12 अगस्त 2023  पुरुषोत्तम एकादशी
14 अगस्त 2023 अधिकमास मासिक शिवरात्रि, सावन सोमवार
15 अगस्त 2023 मंगला गौरी व्रत
19 अगस्त 2023 हरियाली तीज
21 अगस्त 2023 नाग पंचमी
30 अगस्त 2023 रक्षाबंधन Rakshabandhan
31 अगस्त 2023 सावन पूर्णिमा व्रत

Rakshabandhan 2023 Date & Time: रक्षाबंधन 2023 के बारे में सारी जानकारी

रक्षाबंधन (Rakshabandhan)  एक प्राचीन हिंदू त्योहार है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल सावन के महीने में पूर्णिमा तिथि पर रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई में रक्षासूत्र बांधकर उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं। वहीं भाई रक्षा धागे को बंधवा कर अपनी बहन को उम्र भर रक्षा करने का वचन देते हैं। लेकिन इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व दो दिन मनाया जायेगा।

Rakshabandhan 2023 Date & Time:  शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन के दिन भद्रा की वजह से राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 30 अगस्त की रात्रि 9 बजकर 5 मिनट से लेकर 31 अगस्त की सुबह 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगा।

Rakshabandhan 2023 Date & Time:  रक्षाबंधन का पौराणिक महत्वः

रक्षा बंधन की उत्पत्ति का पता प्राचीन काल से लगाया जा सकता है। इस त्योहार का संदर्भ 326 ईसा पूर्व की सिकंदर महान से संबंधित किंवदंतियों में पाया जा सकता है।

हिंदू धर्मग्रंथों में भी रक्षा बंधन के कई वृत्तांत हैं:

ऐसी ही एक कहानी में इंद्र की पत्नी शची ने शक्तिशाली राक्षस राजा बाली के खिलाफ लड़ाई के दौरान इंद्र की रक्षा के लिए उनकी कलाई पर एक धागा बांधा था। यह कहानी बताती है कि प्राचीन भारत में संभवतः पवित्र धागों का उपयोग किया जाता था, जो युद्ध में जाने वाले पुरुषों को सुरक्षा प्रदान करते थे, और केवल भाई.बहन के रिश्ते तक ही सीमित नहीं थे।

भागवत पुराण और विष्णु पुराण की एक अन्य कथा में बताया गया है कि कैसे राजा बलि ने यज्ञ द्वारा तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर ली, इस पर इन्द्र द्वारा भगवान विष्णु से प्रार्थना किये जाने पर भगवान विष्णु ने वामन का रूप धारण करके राजा बलि से भिक्षा मांगी, इस पर गुरू के बार बार मना करने के बावजूद भी राजा बलि ने वामन को तीन पग भूमि दान में दे दी थी और इसके बाद भगवान विष्णु ने उस तीन पग भूमि में तीनो लोक को नापकर इन्द्र को सौंप दिया और राजा बलि के पास कुछ भी नहीं बचा। इस पर राजा बलि ने विष्णु से अपने महल में रहने का अनुरोध किया। विष्णु की पत्नी अर्थात देवी लक्ष्मी, इस व्यवस्था को अस्वीकार करती हैं और राजा बलि को राखी बांधती हैं, जिससे वह उनका भाई बन जाता है। इस भाव से प्रभावित होकर, राजा बलि ने उनकी इच्छा पूरी की, और देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से घर लौटने के लिए कहा।

अगस्त माह में नागपंचमी का त्यौहारः

सावन में शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली पंचमी तिथि को हर साल नागपंचती का त्यौहार बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष नागपंचमी का त्यौहार 21 अगस्त को मनाया जायेगा। भगवान शिव के साथ साथ इस दिन नाग देवता की भी पूजा ही जाती है एवं नाग देवता को दूध भी पिलाने की मान्यता है।

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