GI (Geographical Indication) Tag 2023: क्या होता है जी आई टैग, कैसे मिलता है

GI (Geographical Indication) Tag 2023:

GI(Geographical Indication) Tag 2023: क्या होता है जी आई टैग, कैसे मिलता है

GI (Geographical Indication) Tag 2023: भौगोलिक संकेत या जीआई टैग (Geographical Indications):

भौगोलिक संकेत या जीआई (Geographical Indications) Tag किसी भी ऐसे उत्पाद को दिया जाने वाला एक संकेत है जो किसी विशिष्ट भौगोलिक स्थान पर उत्पन्न होता है। भारत में भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 (Geographical Indications of Goods (Registration and Protection) Act, 1999) के अनुसार जीआई टैग दिए जाते हैं।
साधारण शब्दों में कहें तो इस तरह के उत्पाद में मूल स्थान, जहाँ से वह उत्पन्न हो रहा है, की प्रतिष्ठा और गुण होने चाहिए।

जीआई टैग, अपने कुछ अद्वितीय गुणों के कारण अन्तर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर प्रतिष्ठा हासिल करने वाले आमतौर पर ग्रामीण, सीमांत और स्वदेशी समुदायों द्वारा पीढ़ियों से उत्पादित उत्पादों पर पंजीकृत होते हैं।

GI (Geographical Indication) Tag 2023: वस्तुओं का भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999
भारत में यह अधिनियम, भौगोलिक संकेतों की सुरक्षा के लिए संसद द्वारा पारित एक विशिष्ट अधिनियम है। भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) (World Trade Organization) के एक सदस्य के रूप में बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार संबंधित पहलुओं पर समझौते का अनुपालन करने के तहत यह अधिनियम पारित किया था।

वर्ष 2004-05 में भारत का पहला जीआई टैग उत्पाद दार्जिलिंग की चाय बनी थी और साल 2020 तक इस सूची में 370 उत्पाद जोड़े जा चुके थे।

GI (Geographical Indication) Tag 2023: भौगोलिक संकेतक अधिनियम, 1999ः

भौगोलिक संकेत (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 की धारा 2(1)(ई) के अनुसार, भौगोलिक संकेत एक ऐसे सामान की पहचान के रूप में इंगित करता है, जो किसी देश के विशेष क्षेत्र में उत्पन्न या निर्मित होती हैं या उस क्षेत्र या इलाके में इन वस्तुओं की दी गई गुणवत्ता एवं विशेषता अनिवार्य रूप से इसके भौगोलिक उत्पत्ति के कारण होती है।

GI (Geographical Indication) Tag 2023:  भौगोलिक संकेतों में कुछ प्रमुख पंजीकृत कुछ उत्पाद के नामः

कृषि क्षेत्र में: दार्जिलिंग चाय, बैंगलोर ब्लू अंगूर, मालाबार काली मिर्च।
निर्मित सामानों में:  पोचमपल्ली इकत, कांचीपुरम रेशम साड़ी, सोलापुरी चादर, बाग प्रिंट और मधुबनी पेंटिंग।

जीआई टैग का उपयोग निम्न प्रकार के उत्पादों पर किया जाता है।

हस्तशिल्प जैसे मधुबनी पेंटिंग, मैसूर सिल्क आदि
खाद्य पदार्थ जैसे तिरुपति लड्डू, रसगुल्ला आदि।
कृषि उत्पाद जैसे बासमती चावल आदि।

GI (Geographical Indication) Tag 2023: जीआई टैग के पंजीकरण की प्रक्रिया:

संबंधित वस्तुओं के उत्पादकों का प्रतिनिधित्व करने वाले व्यक्तियों या किसी भी संघ के द्वारा भौगोलिक संकेतक के रजिस्ट्रार के समक्ष जीआई टैग के पंजीकरण हेतु आवेदन करना होता है।

आवेदन में विशेष रूप से उस उत्पाद के भौगोलिक वातावरण, निर्माण की प्रक्रिया, प्राकृतिक और मानवीय कारकों, उत्पादन के क्षेत्र के मानचित्र के साथ, इसके निर्माताओं की सूची, निर्धारित शुल्क आदि का विवरण भी होना चाहिए। आवेदन की प्रारंभिक जांच में कुछ त्रुटि या कमी होने की स्थिति में आवेदक को एक महीने की अवधि के अंदर इसका समाधान करना होता है। रजिस्ट्रार किसी भी आवेदन को निर्धारित मानकों पर स्वीकार, आंशिक रूप से स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है। दिए गए आवेदन को अस्वीकार करने की स्थिति में रजिस्ट्रार द्वारा अस्वीकृति हेतु एक लिखित आधार दिया जाएगा।

GI (Geographical Indication) Tag 2023: भौगोलिक संकेतक:

आवेदन के अस्वीकार होने की स्थिति में आवेदक को दो माह के अंदर अपना जवाब दाखिल करना होता है। अगर पंजीकरण के लिए पुनः अस्वीकृत किया जाता है तो आवेदक इस तरह के फैसले में एक महीने के भीतर अपील कर सकता है।
आवेदन के स्वीकृति होने की स्थिति में तीन महीने के अंदर रजिस्ट्रार, जीआई जर्नल में आवेदन को विज्ञापित कर सकता है। इसके बाद अगर दिये गये आवेदन का किसी के भी द्वारा विरोध नहीं किया जाता है, तो रजिस्ट्रार आवेदक और अधिकृत उपयोगकर्ताओं को पंजीकरण का प्रमाण पत्र प्रदान कर देता है।

GI (Geographical Indication) Tag 2023: भौगोलिक संकेतक: 

जीआई टैग के पंजीकरण शुरू होने के पहले वर्ष में दार्जिलिंग चाय के अलावा, अरनमुला कन्नाडी (केरल की एक हस्तकला), पोचमपल्ली इकत (तेलंगाना की एक हस्तकला) को भी यह संकेत प्रदान किया गया था। वर्ष 2020 तक भारत में पंजीकृत 361 जीआई उत्पादों में से 15 उत्पाद 9 विभिन्न देशों, इटली, फ्रांस, यूके, यूएसए, आयरलैंड, मैक्सिको थाईलैंड, पेरू, पुर्तगाल से संबंध रखते हैं।

GI(Geographical Indication)Tag 2023: भौगोलिक संकेत, अलग-अलग राज्यों के उत्पाद:

कुछ उत्पाद ऐसे हैं जिनकी उत्पत्ति विभिन्न राज्यों से हुई है, ऐसे में मूल का उल्लेख भारत के रूप में किया जाएगा। जैसे फुलकारी हस्तशिल्प की उत्पत्ति पंजाब, हरियाणा, राजस्थान से हुई है। वार्ली पेंटिंग की उत्पत्ति महाराष्ट्र, गुजरात, दमन और दीव से हुई है। मालाबार रोबस्टा कॉफी केरल और कर्नाटक से हुई है।

इनमें से कर्नाटक राज्य से सबसे अधिक उत्पाद जीआई टैग पंजीकृत हैं। तमिलनाडु दूसरा सबसे अधिक जीआई टैग पंजीकृत उत्पादों वाला राज्य है। जबकि महाराष्ट्र , देश में तीसरा सबसे अधिक जीआई पंजीकृत उत्पादों वाला राज्य हैं।

GI (Geographical Indication) Tag 2023: FAQs भौगोलिक संकेत (GI) के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न:

प्रश्न: भारत में जीआई टैग कौन जारी करता है ?
उत्तर: भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999 के अनुसार यह टैग भौगोलिक संकेतक रजिस्ट्री द्वारा उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत जारी किया जाता है। वर्ष 2003 में जीआई टैग देने की शुरुआत हुई थी एवं साल 2004 में सबसे पहले पश्चिम बंगाल की दार्जलिंग चाय को जीआई टैग दिया गया था

प्रश्न: जीआई टैग मिलने के क्या फायदे होते है ?
उत्तर: जीआई टैग मिलने से उत्पादों को कानूनी संरक्षण मिलता है या साधारण शब्दों में कहें तो उपलब्ध बाजार में उसी नाम का दूसरा प्रोडक्ट नहीं लाया जा सकता है। किसी भी उत्पाद को जीआई टैग का मिलना उस उत्पाद की अच्छी गुणवत्ता को भी दर्शाता है एवं इसी गुणवत्ता के चलते उस उत्पाद को एक बेहतरीन बाजार भी उपलब्ध हो जाता है।

प्रश्न: कितने समय के लिये मिलता है जी आई टैग ?
उत्तर: जीआई टैग के पंजीकरण का प्रमाण पत्र मात्र 10 वर्ष की अवधि के लिए मिलता है। इसके बाद इसका नवीनीकरण करा सकते हैं। जीआई टैग मिलने से नकली उत्पाद को रोकने में मदद मिलती है तथा उस उत्पाद का मूल्य और उससे जुड़े लोगों की अहमियत बढ़ जाती है।

GI (Geographical Indication) Tag 2023: भौगोलिक संकेतक:

इस समय भारत में 300 से भी अधिक उत्पादों को जीआई टैग मिल चुका है। इनमें कश्मीर का केसर और पश्मीना शॉल, नागपुर के संतरे, बंगाली रसगुल्ले, अलीबाग का सफेद प्याज, भागलपुर का जर्दालु आम, महोबा का पान, बनारसी साड़ी, तिरुपति के लड्डू, रतलाम की सेव, बीकानेरी भुजिया आदि शामिल हैं।

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