Chhath Puja 2023

Chhath Vrat 2023: महापर्व छठ 2023 पर पूजा के नियम और विधान, जानिये किन किन सामग्रियों का उपयोग करें

दोस्तों छठ पूजा हर साल कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है। चार दिनों तक चलने वाला यह त्योहार बिहार और पूर्वांचल के लोगों के लिये बेहद खास होता है। छठ की शुरूवात नहाई खाई के साथ होती है। छठ पूजा का व्रत करने वाले लोग लगातार 36 घंटे तक बिना कुछ खाये पीये निर्जला उपवास करते हैं। छठ व्रत के दौरान कई कड़े नियम भी होते हैं जिनका पालन करना बेहद जरूरी होता है नहीं तो ऐसा माना जाता है कि छठी मैया नाराज हो सकती हैं। ऐसे में आइये जानते हैं कि छठ पूजा में किन बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना आवश्यक होता है और भूलकर भी उन्हें नहीं करना चाहिये।

आप सभी को बता दें कि छठ का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण व्रत होता है और इस व्रत का पालन बहुत ही शुद्वता के साथ किया जाता है। क्यों कि इस व्रत में हम सूर्य को प्रणाम करते हैं। यही एक मात्र व्रत है जहाँ पर अस्त होते हुये सूर्य की भी पूजा होती है। आपने देखा होगा कि सामान्यतः इस संसार का नियम है, कि उपर उठते हुये लोगों को तो सभी लोग प्रणाम करते है, लेकिन जिसके जीवन में ढ़लान की परिस्थिति होती है उसको इस संसार में कोई प्रणाम नही करता है। तो ये व्रत आपको यह भी सिखाता है कि अगर कोई भी व्यक्ति आपके जीवन में कुछ भी काम आया है, या फिर आपने जिससे भी कुछ भी प्राप्त किया है, उसके खराब समय में, या उसके जीवन की ढ़लान की परिस्थितियों में भी, आपको उस व्यक्ति को उतना ही सम्मान देना है जितना कि पहले था।

Chhath Vrat 2023: सभी को मिलकर सूर्य को प्रणाम करना चाहिये

छठ का यह व्रत हमें बहुत कुछ सिखाता है, यह अपनी मनोकामनाओं को पूर्ण करने का व्रत है। आप सभी को पता होगा कि हमारे भारत की यह विविधता है कि कोई भी पर्व भारत में कहीं भी मनाया जाता है तो हम सभी लोग उसको मिलकर मनाते हैं। आपने देखा भी होगा कि दीपावली का सुन्दर त्योहार लगभग पूरे विश्व में ही मनाया जाने लगा है या यूँ कहें कि पूरे विश्व में लोग दीपावली का त्योहार मनाने के लिये तैयार हो रहे हैं। तो ऐसी परिस्थिति के अन्तर्गत अगर आप इस छठ के व्रत को करते हैं या नहीं भी करते हैं तो भी आपको सूर्य को नमस्कार करना बहुत ही आवश्यक होता है। इसलिये आपको भी श्रद्वापूर्वक हाथ जोड़कर छठी मैया को प्रणाम करना चाहिये, सूर्य को प्रणाम करना चाहिये और यह प्रार्थना करें कि हे छठी मैया आप हमारे उपर अपनी कृपा बनाये रखें और हमारी सभी मनोकामनाओ को पूर्ण करें।

Chhath Puja 2023

Chhath Vrat 2023: क्या है अर्ध्य और पूजा का शुभ मुहूर्तः

अगर हम मुहूर्त की बात करते हैं तो हमको सबसे पहले भगवान राम के द्वारा कही गयी इस चैपाई को याद करना चाहिये। जो इस छठ के व्रत के लिये बहुत ही खास होती है-

निर्मल मन जन सो मोहि पावा।
मोहि कपट छल छिद्र न भावा।।

दोस्तों आपकी जानकारी के लिये बता दें कि बाकी सभी व्रतों और पूजाओं में की गयी गलतियाँ शायद माफ होती हैं, परन्तु यही एक ऐसा कठिनतम व्रत है, जिसमें कोई भी गलती स्वीकार्य नहीं होती है। अगर इस व्रत के मुहूर्त की बात करें तो सामान्यतः चतुर्थी तिथि से प्रारंभ होने वाला यह व्रत नहाई-खाई से प्रारंभ होता है और फिर खरना और उसके बाद सजिया अर्ध्य, भोरवा अर्ध्य होता है। तो अगर हम सबसे पहले दिन की बात करते है, जिसको हम नहाई खाई भी कहते हैं जिस दिन अपने आप को इस कठिनतम व्रत के लिये तैयार करना है, सामान्यतः इसी दिन से इस व्रत का प्रारंभ हो जाता है, तो उसके शुभ मुहूर्त के लिये सुबह 05ः30 बजे से लेकर 06ः45 बजे तक का समय एक शुभ संयोग बन रहा है। जिस समय पर पूजन करना आपके लिये अति उत्तम होगा। बाकी अगर हम बात करें तो इस व्रत में लोगों के अपने घर के कुछ नियम होते हैं, उसके अनुसार भी पूजा की जाती है। इसमें सामान्यतः ऐसा देखा जाता है कि जब भी हम छठ पूजा की बात करते हैं, तो लोग मुहूर्त को लेकर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं क्योंकि अस्त होते हुये सूर्य को अर्ध्य देना होता है तो समय से पहले भी जल में खड़े होकर पूजा प्रारंभ की जा सकती है। और अगर प्रातः सूर्य के अर्ध्य की बात करें, तो कई बार लोग रात्रि के 03ः00 बजे से ही जल में खड़े होकर पूजा का प्रारंभ कर देते हैं। लेकिन हम यहाँ पर जिस मुहूर्त की बात कर रहे हैं, इस समय पर की गयी प्रार्थना आपके लिये विशेष लाभप्रद हो सकती है।

Chhath Vrat 2023: 19.11.2023 को है सजिया अर्ध्य

दूसरा अगर हम खरना के मुहूर्त की बात करते हैं, तो सुबह 06ः00 बजे से लेकर 06ः50 तक का समय उत्तम माना गया है। और शाम का 05ः00 बजे से लेकर 06ः20 बजे तक का समय खरना की पूजा के लिये बहुत ही विशिष्ट समय होगा।
अगर हम सजिया अर्ध्य की बात करें जो कि 19.11.2023 का एक विशेष पर्व है, इसमें संध्या के अर्ध्य के लिये आपको बता दें कि सामान्यतः सूर्य के अस्त होने का समय अलग अलग स्थान के हिसाब से थोड़ा परिवर्तित हो सकता है, इसलिये 19 तारीख को शाम 05ः00 बजे से 06ः10 बजे तक का समय अर्ध्य देने का उत्तम समय होगा, इसी के बीच में अलग अलग स्थानों पर सूर्य अस्त होगा। आप इस समय के पहले से भी पूजा प्रारंभ कर सकते है या फिर इस मुहूर्त के बाद तक भी प्रार्थना कर सकते हैं। ये आपकी श्रद्वा पर निर्भर करता है। लेकिन शाम 05ः00 बजे से लेकर 06ः20 बजे तक का समय एक महत्वपूर्ण समय है, जिसमें की गयी प्रार्थना बहत की फलीभूत हो सकती है।

अगर भोरवा अर्ध्य की बात करें, जो कि 20.11.2023 को है, इसमें अगर आप देखेंगे तो कई लोग तो 19 तारीख की रात्रि से ही जल में खड़े रहते हैं और 20 तारीख की सुबह में पूजा करके पानी से बाहर निकलते हैं। आपको बता दें कि 20 नवम्बर 2023 को सुबह का अर्ध्य है। तो अगर हम 20 तारीख की सुबह के अर्ध्य के शुभ मुहूर्त की बात करें तो प्रातःकाल 06ः00 बजे से लेकर 06ः52 बजे तक का समय उत्तम होगा।

Chhath Puja 2023

Chhath Vrat 2023: पूजा के लिये सूप में क्या क्या सामग्री रखना चाहियेः

आप सभी को बता दें कि छठ का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण व्रत होता है और इस व्रत का पालन बहुत ही शुद्वता के साथ किया जाता है। ऐसे में आप सूप में ताम्र पात्र जैसे तांबे के लोटे का प्रयोग करें, फूल, फल और चावल को विशेष रूप से रखना चाहिये। चावल के लड्डू, पुआ, ठेकुआ जैसे मिष्ठानों को रखना चाहिये। काले चने और कच्चे चावल का प्रयोग करना चाहिये। तिलक के लिये सिन्दूर का रखा जाना अनिवार्य है। बड़े साइज के नींबू और गन्ने को पत्ते सहित रखने का भी विधान है। इसके साथ साथ दीप को भी रखना चाहिये। अगर हो सके तो एक हाथी बनाकर जरूर रखें, जो भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है। हल्दी और अदरक भी रखने का नियम है। साथ ही आपको बता दें कि इस पूजा के अन्तर्गत तीन सूप रखने का भी नियम है। सारी सामग्रियों को रखने के लिये टोकरी बांस की बनी होनी चाहिये। इस पूजा में ऋतु फल को लेने का भी नियम है, इसलिये हो सके तो पूजा के समय की ऋतु में जो भी फल होते हैं, उन्हीं फलों का प्रयोग करें। इस हिसाब से देखा जाये तो ये एक प्रकृति की भी पूजा है। बाकी आप अपनी सुविधानुसार अगर आपके पास सारी सामग्रियाँ नहीं उपलब्ध हो पा रही हैं तो भी आप शुद्व मन से अगर जल का भी अर्पण सूर्य भगवान को करते हैं, तो ये भी आपके लिये लाभप्रद होगा।

Chhath Vrat 2023: पूजन के लिये किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहियेः

आपको सबसे पहले बता दें, कि पूजन के लिये सबसे महत्पूर्ण आपके मन की निर्मलता होती है, मन में किसी प्रकार का क्लेश नहीं रखना चाहिये। खास करके छठी के रूप मे हम सूर्य भगवान की पूजा करते हैं, और आपने यह भी देखा होगा कि सूर्य की कृपा सभी के उपर एक समान होती है, उसमें किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होता है। इसलिये सबसे महत्वपूर्ण बात है कि इस पूजा को करते समय किसी प्रकार का भेदभाव या कोई कपट मन में नहीं रखना चाहिये।

Chhath Vrat 2023: छठ पूजा को करते समय किसी भी प्रकार के प्लास्टिक का प्रयोग ना करेः

इस पूजा में किसी प्रकार के प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करना चाहिये, शास्त्रों के विधान के अनुसार अगर देखा जाये तो स्टील के बर्तनों का भी प्रयोग वर्जित किया गया है। इसलिये अगर हो सके तो सिर्फ ताम्रपात्र का ही प्रयोग करें और सूप में सभी सामग्रियों को रखें। इस व्रत में नहाय खाय में विशेष रूप से घिया की सब्जी बनानी चाहिये। इस समय में मांसाहार आदि चाजों को पूरी तरह से अपने से दूर कर देना चाहिये। साथ ही सभी नशीले पदार्थों को पूरी तरह से वर्जित कर देना चाहिये। पूरी श्रद्वा के साथ बिना मसाले के प्रयोग से बनी घिया की सब्जी, उबले चने और चावल का प्रयोग नहाय खाय के दिन करना चाहिये।

Chhath Puja 2023

Chhath Vrat 2023: क्या है छठ पूजा के पीछे की कथा और उसका महत्वः

ऐसा माना जाता है, कि आदि शक्ति माता जगदम्बा ने सबसे पहले इस व्रत को प्रारम्भ करके इसका पालन किया था। जब भगवान राम और रावण के युद्व का समय चल रहा था और जब एक बार ऐसी परिस्थिति आ गयी थी जिसमें यह प्रतीत हो रहा था कि रावण विजय प्राप्ति की तरफ अग्रसर हो रहा है। वहाँ पर फिर भगवान राम में कहा था कि हमने बिना आदि शक्ति की आराधना किये ही युद्व का प्रारम्भ किया है। इसलिये ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आज रावण अकेले नहीं बल्कि उसके साथ कोई शक्ति युद्व कर रही थी और फिर यहीं से भगवान राम ने नव दुर्गा की आराधना करना प्रारम्भ किया और यहीं पर आदित्य हृदय स्त्रोत के अनुसार ऋषि मुनियों ने भगवान राम को समुद्र किनारे पूर्ण विधि विधान के साथ सूर्य की पूजा भी करायी और उसी समय इस पूजन को आदि शक्ति माता जानकी ने लंका में रहकर किया और तभी से नवरात्रि पूजा का भी विधान शुरू हुआ है।

Chhath Vrat 2023: छठ व्रत के समय किसी भी प्रकार की गलती होने पर क्या करेंः

शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक जीव के अन्दर भगवान के स्वरूप का वास होता है, तो अगर पूजा के नियमों का पालन करते समय अनजाने में किसी प्रकार की भूल हो जाती है तो उसकी क्षमा याचना करते हुये पूजन को आगे बढ़ाना चाहिये। अनजाने में हुयी गलतियों को भगवान सदैव माफ करते है।

इस प्रकार से हमने ये समझा कि छठ पूजा में किन किन बातों को ध्यान में रखना चाहिये और किस तरीके से इस महान पर्व को मनाना चाहिये। आपको सभी को श्रद्वापूर्वक हाथ जोड़कर छठी मैया को प्रणाम करना चाहिये, सूर्य को प्रणाम करना चाहिये और यह प्रार्थना करे कि हे छठी मैया आप हमारे उपर अपनी कृपा बनाये रखें और हमारी सभी मनोकामनाओ को पूर्ण करें। धन्यवाद!

Source: News State

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