Rakshabandhan 2023 Date & Time: रक्षाबंधन 2023 के बारे में सारी जानकारी

Rakshabandhan 2023

Rakshabandhan 2023 Date & Time: रक्षाबंधन 2023 के बारे में सारी जानकारी

इस साल 2023 में अगस्त में सावन के साथ-साथ अधिक मास का संयोग बना हुआ है। इस साल सावन पूरे दो महीने का है। जो 4जुलाई से शुरू होकर 31 अगस्त तक चलेगा। इस वर्ष सावन के दो महीने तक चलने का मुख्य कारण यह है कि इस साल अधिकमास भी लगा हुआ है। आपको यह भी बता दें कि सावन के साथ वाले अधिकमास में भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु की भी पूजा करना बहुत ही फलदायी सिद्व होता है।

Rakshabandhan 2023 Date & Time: व्रत एवं त्यौहारः

अगस्त का महीना व्रत एवं त्यौहार में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है और इस बार तो अगस्त माह की शुरूआत अधिकमास की पूर्णिमा के साथ हुयी है।

1 अगस्त 2023 अधिकमास पूर्णिमा व्रत, मंगला गौरी व्रत
2 अगस्त 2023 पंचक शुरू
7 अगस्त 2023 सावन सोमवार
8 अगस्त 2023 मंगला गौरी व्रत, कालाष्टमी
12 अगस्त 2023  पुरुषोत्तम एकादशी
14 अगस्त 2023 अधिकमास मासिक शिवरात्रि, सावन सोमवार
15 अगस्त 2023 मंगला गौरी व्रत
19 अगस्त 2023 हरियाली तीज
21 अगस्त 2023 नाग पंचमी
30 अगस्त 2023 रक्षाबंधन Rakshabandhan
31 अगस्त 2023 सावन पूर्णिमा व्रत

Rakshabandhan 2023 Date & Time: रक्षाबंधन 2023 के बारे में सारी जानकारी

रक्षाबंधन (Rakshabandhan)  एक प्राचीन हिंदू त्योहार है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल सावन के महीने में पूर्णिमा तिथि पर रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई में रक्षासूत्र बांधकर उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं। वहीं भाई रक्षा धागे को बंधवा कर अपनी बहन को उम्र भर रक्षा करने का वचन देते हैं। लेकिन इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व दो दिन मनाया जायेगा।

Rakshabandhan 2023 Date & Time:  शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन के दिन भद्रा की वजह से राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 30 अगस्त की रात्रि 9 बजकर 5 मिनट से लेकर 31 अगस्त की सुबह 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगा।

Rakshabandhan 2023 Date & Time:  रक्षाबंधन का पौराणिक महत्वः

रक्षा बंधन की उत्पत्ति का पता प्राचीन काल से लगाया जा सकता है। इस त्योहार का संदर्भ 326 ईसा पूर्व की सिकंदर महान से संबंधित किंवदंतियों में पाया जा सकता है।

हिंदू धर्मग्रंथों में भी रक्षा बंधन के कई वृत्तांत हैं:

ऐसी ही एक कहानी में इंद्र की पत्नी शची ने शक्तिशाली राक्षस राजा बाली के खिलाफ लड़ाई के दौरान इंद्र की रक्षा के लिए उनकी कलाई पर एक धागा बांधा था। यह कहानी बताती है कि प्राचीन भारत में संभवतः पवित्र धागों का उपयोग किया जाता था, जो युद्ध में जाने वाले पुरुषों को सुरक्षा प्रदान करते थे, और केवल भाई.बहन के रिश्ते तक ही सीमित नहीं थे।

भागवत पुराण और विष्णु पुराण की एक अन्य कथा में बताया गया है कि कैसे राजा बलि ने यज्ञ द्वारा तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर ली, इस पर इन्द्र द्वारा भगवान विष्णु से प्रार्थना किये जाने पर भगवान विष्णु ने वामन का रूप धारण करके राजा बलि से भिक्षा मांगी, इस पर गुरू के बार बार मना करने के बावजूद भी राजा बलि ने वामन को तीन पग भूमि दान में दे दी थी और इसके बाद भगवान विष्णु ने उस तीन पग भूमि में तीनो लोक को नापकर इन्द्र को सौंप दिया और राजा बलि के पास कुछ भी नहीं बचा। इस पर राजा बलि ने विष्णु से अपने महल में रहने का अनुरोध किया। विष्णु की पत्नी अर्थात देवी लक्ष्मी, इस व्यवस्था को अस्वीकार करती हैं और राजा बलि को राखी बांधती हैं, जिससे वह उनका भाई बन जाता है। इस भाव से प्रभावित होकर, राजा बलि ने उनकी इच्छा पूरी की, और देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से घर लौटने के लिए कहा।

अगस्त माह में नागपंचमी का त्यौहारः

सावन में शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली पंचमी तिथि को हर साल नागपंचती का त्यौहार बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष नागपंचमी का त्यौहार 21 अगस्त को मनाया जायेगा। भगवान शिव के साथ साथ इस दिन नाग देवता की भी पूजा ही जाती है एवं नाग देवता को दूध भी पिलाने की मान्यता है।

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Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: कब लगता है अधिक मास

अंग्रेजी कैलेंडर में तो हर साल 12 महीने होते हैं लेकिन हिन्दू पंचांग के अनुसार हर 3 साल में एक बार एक अतिरिक्त मास होता है जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। हिंदू पंचांग सूर्य और चंद्रमा वर्ष की गणना से चलता है। अधिक मास चंद्रमा साल का अतिरिक्त भाग है जो कि 32 माह 16 दिन और 8 घंटों के अंतर में बनता है। सूर्य और चंद्रमा वर्ष के बीच इस अंतर को पाटने या संतुलन बनाने के लिए अधिक मास लगता है।
Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023 में गणना के अनुसार सूर्य वर्ष में 365 दिन होते हैं और चंद्रमा वर्ष में 354 दिन होते हैं । इस तरह में 1 साल में चंद्रमा और सूर्य वर्ष में 11 दिनों का अंतर होता है और 3 साल में अंतर 33 दिनों का हो जाता है। यही 33 दिन की सीमा में जुड़ जाता है जिसे अधिक मास का नाम दिया गया है।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: क्या है अधिक मास का पौराणिक आधार

अधिक मास से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार एक बार राजा हिरणकश्यप ने कठोर तप से ब्रह्माजी को प्रसन किया और उनसे वरदान अमरत्व का मांगा लेकिन अमृता का वरदान निषेध है इसलिए ब्रह्माजी ने उसे कोई और वर मांगने को कहा तब हिरणकश्यप ने ब्रह्माजी से कहा कि आप ऐसा वरदान दीजिए जिसमें संसार का कोई नर पशु पक्षी देवता या असुर हमें मार ना सके और उसे वर्ष के सभी 12 महीने में भी मृत्यु प्राप्त ना हो उसकी मृत्यु ना दिन का समय हो ना रात का हो वह ना ही किसी अस्त्र से मरे ना किसी शस्त्र से मरे उसे ना घर में मारा जा सके और ना ही घर से बाहर। ब्रह्माजी ने उसे ऐसा ही वरदान दे दिया लेकिन इस वरदान के मिलते ही हिरणकश्यप स्वयं को अमर और भगवान समान मानने लगा तब भगवान विष्णु ने अधिक मास में नरसिंह अवतार धारण कर आधा पुरुष और आधे शेर के रूप में प्रकट हुए और शाम के समय देहरी के नीचे अपने नाखूनों से हिरण्यकश्यप का सीना चीरकर उसे मृत्यु के द्वार भेजकर उसके जीवन का अंत किये। इस से यह भी मान्यता है कि इस मास में कुकृत्य करने वाले को भगवान विष्णु अवश्य सजा देते हैं।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: अधिक मास कितने वर्ष के अंतराल पर आता है आइए जानते हैं:

हिंदू पंचांग एवं सनातन धर्म के अनुसार हर 3  साल में एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाता है जिसे अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास के रूप में जाना जाता है । सनातन धर्म एवं वैदिक काल रीति रिवाज से हम सब पुरुषोत्तम मास को मनाते चले आ रहे है इस साल सूर्य वर्ष  365 दिन और  6 घंटे का होता है वही चंद्रवर्ष 354 दिन का माना जाता है।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: कितने वर्ष पहले सावन में मलमास पड़ा था

मलमास या पुरुषोत्तम मास सावन के महीने में पिछले बार 19 साल पहले पड़ा था । सन 2004 ईस्वी में सावन 2 महीने का हुआ था । इसके बाद 2023 में सावन मास के महीने में मलमास पड़ा है। भगवान विष्णु अपने मुखारविंद से इस मलमास को अपने नाम से जोड़कर इस मास की महिमा बढ़ा दिये। भगवान विष्णु ने इसका महत्व और गुणगान करते यह भी बताया कि जो व्यक्ति पुरुषोत्तम मास में मेरा नाम जप तप, पूजा पाठ, ध्यान, यज्ञ, अनुष्ठान, ब्राह्मणों द्वारा कराता है या स्वयं करता है उसे अपेक्षाकृत 10 गुना फल की प्राप्ति होती है। ब्राह्मणों को दान पुण्य करना, गरीबों को दान देने, भोजन कराने से इसका भी 10 गुना लाभ प्राप्त होता है।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: अधिक मास में क्या करना चाहिए

अधिक मास में विभिन्न प्रकार के धार्मिक कार्य अनुष्ठान करना चाहिए जैसे उपवास रखना, धार्मिक ग्रंथों को पढ़ना, मंत्र का जाप एवं पाठ करना, प्रार्थना करने के साथ साथ अपने गुरु के द्वारा गुरुदीक्षा के समय दिया हुआ गुरुमंत्र को अधिक से अधिक जाप करना चाहिए और अपने गुरु को ध्यान लगाकर जप करना चाहिए । अपने घर में कुल देवी देवता को ध्यान लगाकर और अपने इष्ट देवी देवता की पूजा करनी चाहिए। सात्विक आहार मधुर वाणी एवं मौन धारण करना चाहिए। विभिन्न अवधि या पूरे दिन के व्रत उपवास अवश्य करना चाहिए। सभी सनातन धर्म के लोगों को अधिक मास के व्रत को करना चाहिए । ऐसा करने से आपके जीवन में सुख समृद्वि बनी रह सकती है। और आपका जीवन सुखमय बन सकता है।
बाबा भोले का विशेष रूप से बाबा का पवित्र माह के सावन महीने में सभी को नियमानुसार व्रत एवं अनुष्ठान दान पूजा पाठ करना एवं कराना चाहिए । इसका 10 गुना लाभ भक्तों को प्राप्त होता है । इस वर्ष 2023 में सावन मास का समय 4 जुलाई से 31 अगस्त तक रहेगा इसे हम अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास के रूप में जानते है। जिस माह में एक अमावस्या से दूसरी अमावस्या के बीच सूर्य की संक्रांति नहीं होती है इसे अधिक मास कहते हैं।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023:  खरवास और मलमास में क्या अंतर है:

हिंदू पंचांग के अनुसार कुछ साल ऐसे होते हैं जिसमें अधिक मास लगता है। अधिक मास लगने के कारण पूर्व त्योहारों की तिथियों में भी अंतर हो जाता है। तो वहीं खरवास लगने पर शुभ मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023 अधिक मास में जन्म का महत्वः

ज्योतिष के अनुसार सावन माह में जन्मे बच्चे बेहद भाग्यशाली होते हैं ।शास्त्रों के अनुसार बताया गया है कि अधिक मास में पैदा हुए बच्चे बहुत भाग्यशाली होते हैं । इनके जन्म मात्र से ही माता पिता का भाग्योदय होता है।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: सावन मास के महीने में चतुर्मास व्रत:

सावन मास के महीने में 4 माह का चतुर्मास व्रत होता है। जो कि इस वर्ष 2023 में अधिक मास होने के कारण 5 माह का चतुर्मास व्रत होगा। चतुर्मास में भगवान विष्णु पूरे 4 माह के लिए योग निद्रा में होते हैं । लेकिन इस साल भगवान विष्णु 5 महीने के लिये क्षीर सागर में शयन करेंगे एवं योग निद्रा में रहेंगे । इस दौरान गृह प्रवेश, मुंडन, विवाह, जनेऊ संस्कार आदि जैसे शुभ मांगलिक कार्य नहीं होता है।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: इस वर्ष सावन में आठ सोमवार व्रत पड़ेगा

सावन महीने में आमतौर पर चार या पांच सोमवार पड़ते हैं। लेकिन 2023 में 8 सावन सोमवार के व्रत होंगे क्योंकि पंचांग के अनुसार श्रावण कृष्ण पक्ष 4 से 17 जुलाई तक है। इसके बाद 18 जुलाई से अधिकमास आरंभ होगा । जो कि 16 अगस्त तक रहेगा, 17 तारीख से सावन का शुक्ल पक्ष शुरू होगा। 31 अगस्त को पूर्णिमा के दिन सावन समाप्त हो जायेगा।

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लेखक एवं मार्गदर्शकः आचार्य श्री गिरजेश्वर चैाबे जी, बनारस

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Food Precaution in Rainy Season: बारिश के मौसम में खाने की इन 5 चीजों का सेवन कभी ना करें

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Food Precaution in Rainy Season:

Food Precaution in Rainy Season: बारिश के मौसम में खाने की इन 5 चीजों का सेवन कभी ना करें

मानसून के आते ही मौसम (Whether) बहुत सुहाना हो जाता है, इस समय पूरे भारत में मानसून ने दस्तक दे दी है। इस समय लोगों को गर्मी से छुटकारा तो मिल जाता है पर यह मानसून अपने साथ अनगिनत बीमारियाँ भी लेकर आता है। जिसमे वायरल इन्फेक्शन जैसी बीमारियाँ बहुत तेजी से फैलती हैं। इस समय अपने खान-पान का अच्छे से ध्यान रखना बेहद जरूरी हो जाता है। मानसून में खान-पान में किन-किन चीजों का परहेज करना चाहिये। आइये इसके बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं।

Food Precaution in Rainy Season: स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार मानसून में खाने पीने का विशेष ध्यान रखने के साथ-साथ अपने घर को अच्छे से साफ रखना काफी अच्छा रहता है। इस मौसम में सेहत के प्रति किसी भी लापरवाही से संक्रमण का खतरा बना रहता है। हालांकि बारिश के मौसम में समोसा, पकौड़ी जैसी चीजों को ज्यादा खाने का मन करता है। लेकिन ज्यादा तैलीय चीजें खाना इस मौसम में बीमारियों को बुलावा देने के जैसा है। अगर हो सके तो इन चीजों को घर में ही साफ-सफाई के साथ बना के खायें, इससे किसी भी प्रकार की बीमारी का खतरा बहुत हद तक कम हो जाता है।

Food Precaution in Rainy Season: बारिश के मौसम में बीमारियों से बचने के लिए क्याक्या नहीं खाना चाहिए:

1.  हरी सब्जियों का सेवन न के बराबर करें।
बरसात के मौसम में किसी भी प्रकार के फंगस एवं बैक्टीरिया के फैलने का खतरा काफी बढ़ जाता है इसलिये इस मौसम में हरी पत्ते वाली सब्जियाँ जैसे पालक, मेथी, साग, पत्तागोभी आदि को खाने से परहेज करना चाहिये। इससे पेट में संक्रमण का खतरा बना रहता है क्योकि पत्तेदार सब्जियों में छोटे कीड़े मकोड़ों के पनपने की दर बरसात के मौसम में काफी हद तक बढ़ जाती है। करेले और टिण्डे की सब्जी बारिश के मौसम में गुणकारी होती है।

2.  मसालेदार एवं तला भुना खानाः

तली हुयी और मसालेदार चीजों का सेवन करना वैसे भी किसी मौसम में बेहद हानिकारक होता है। ऐसी चीजों के दुष्परिणाम दूरगामी होते है। इसलिये हमको इन चीजों के खाने में ज्यादा संकोच नहीं होता। परन्तु आपको बता दें कि बरसात के मौसम में ज्यादा मसालेदार और तला भुना खाना खाने से आपके पेट की पाचन क्रिया पर पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है
3.  दही का सेवनः
चूंकि दूध में लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया के पनपने से ही दही बनता है, ये बैक्टीरिया सेहत के हिसाब से बरसात के मौसम में सही नहीं माने जाते हैं। इसलिये इस मौसम में पैकेज्ड डेयरी उत्पाद के सेवन से बचना चाहिये।
4.  मांसाहारी भोजन के सेवन से बचेंः
बारिश के मौसम में ज्यादा चर्बी वाले भोजन को पचाने में बहुत मुश्किल होती है क्योंकि इस मौसम में हमारे शरीर की पाचन क्रिया धीमी हो जाती है। इसलिये इस मौसम में मांसाहार करने से परहेज करना चाहिये।
5.  सलाद का सेवनः
बारिश के मौसम में काटकर रखी गयी फल और सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिये क्योंकि इस मौसम में चलने वाली हवा में नमी होने के कारण फंगस और बैक्टीरिया के लगने का खतरा बढ़ जाता है। अगर आपको सलाद का सेवन करना है तो आप तुरन्त ही काटकर सलाद खा सकते है लेकिन बाद में इसके सेवन से परहेज करना चाहिये।

Food Precaution in Rainy Season: आइये जानते है कि बारिश में मौसम में किन-किन चीजों का सेवन करना सही माना गया है:

जून के माह में तेज गर्मी के बाद जुलाई में मौसम में अचानक से बदलाव के कारण सर्दी, बुखार, दस्त, खांसी जैसी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। ऐसे में बारिश के मौसम में क्या खाना चाहिये क्या नहीं इसका ख्याल रखना बेहद जरूरी हो जाता है। इसी क्रम मेें आइये जानते हैं कि बारिश में किन चीजों का सेवन गुणकारी होता है।
1.  गर्म/गुनगुने पानी का सेवनः
गर्म पानी का सेवन बारिश के मौसम में बहुत अधिक फायदेमंद हो सकता है। बारिश के मौसम में गले में खराश होना, नाक का बन्द होना और नाक का बहना आम बात होती है। ऐसे में गर्म पानी पीने से इस तरह की परेशानियों से निजात पायी जा सकती है। दिन में कम से कम दो बार सुबह और शाम में गुनगुने पानी का सेवन करना लाभदायक होता है।
2.  खट्टे फलों का सेवनः
आंवला, संतरा और मोसम्मी जैसे खट्टे फलों का सेवन करना या इनका ताजा जूस पीना बारिश के मौसम में लाभकारी हो सकता है। इन फलों में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है जो आपके लीवर को स्वस्थ रखने में बहुत ही मददगार होता है इससे आपकी पाचन क्रिया भी सही बनी रहती है।

3.  सूखे मेवे का सेवनः

रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सूखे मेवे अहम भूमिका निभाते हैं, चूँकि सूखे मेवे को खाने के परिणाम तुरंत नहीं दिखते हैं परन्तु इसके दूरगामी परिणाम बहुत ही अच्छे होते हैं। ड्राइ फ्रूट्स विटामिन, प्रोटीन एवं फाइबर से भरपूर होते है इसलिये बारिश के मौसम में इनको खाना बहुत ही लाभप्रद हो सकता है। इनके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बनी रहती है और बीमारियों से भी बचाव हो सकता है।

4.  हर्बल चाय का सेवनः

हर्बल चाय में जीवाणुरोधी गुण मौजूद होने के कारण बारिश के महीने में होने वाले संक्रमण से बचाव करने में बहुत ही उपयोगी सिद्व हो सकता है। बरसात में कोशिश करें कि सामान्य चाय की जगह हर्बल टी का ही उपयोग करें।

बारिश के मौसम में जलभराव होने के कारण मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों की संख्या बढ़ जाती है। और इस मौसम में आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। ऐसे में जरा सा भी वायरल की चपेट में आने पर बिना बारिश में भीगे ही आप बीमार पड़ सकते हैं। इसलिये ऊपर दी गयी जानकारियों का प्रयोग वातावरण के अनुकूल एवं अपनी सुविधा के अनुसार कर सकते है।

डिस्क्लेमरः  उपरोक्त लेख एक जानकारी मात्र है इसका इस्तेमाल किसी भी प्रकार के दवा या इलाज के विकल्प के रूप में नहीें किया जा सकता है। किसी भी समस्या के लिये हमेशा अपने डाक्टर से सलाह जरूर लें।

 

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सावन का महीना आज 4 जुलाई से शुरू:

सावन का महीना शिव जी का प्रिय माह है इसलिए सावन में शिव जी को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद पाने के लिए कई उपायों के बारे में बताया जाता है, हर हर महादेव और बम बम भोले की गूंज से मंदिर और शिवालयों का वातावरण शिवमय हो गया है अगले 2 महीने तक भक्त महादेव की पूजा-अर्चना करेंगे । शिव मंदिरों में भोले बाबा के नाम का जय घोष गूंजने लगा है इस बार सावन का महीना 4 जुलाई से लेकर 31 अगस्त तक रहेगा।

अधिक मास का संयोग:

सावन के महीने के साथ  ही 2023 में अधिक मास का संयोग बन रहा है इसलिए सावन के महीने में 1 महीने और अधिक मास रहेगा, 19 साल के बाद ऐसा संयोग दोबारा बन रहा है। हालांकि यह अधिक मास पहले बहुत अशुभ माना जाता था तथा इस मास में कोई भी शुभ कार्य ना करने की सलाह दी जाती थी परन्तु बाद में ऐसा माना जाता है कि भगवान विष्णु ने इस महीने को अपना नाम दे दिया तभी से इस मास का महत्व बहुत ही बढ़ गया और इस मास को पुरुषोत्तम मास के नाम से जाना जाने लगा। अधिक मास में धर्म-कर्म के कार्यों को करने से उसका सर्वोत्तम परिणाम मिलता है। इसलिये ऐसा माना जाता है कि अधिक मास वाले सावन में भगवान शिव की पूजा अर्चना करने के साथ-साथ भगवान विष्णु की आराधना करना अत्यधिक गुणकारी होता है।  2023 में सावन में पड़ने वाले अधिक मास का समय 18 जुलाई से शुरू होकर 16 अगस्त तक चलेगा।

इस बार व्रत रखने वाले सोमवार की संख्या बढ़ी:

मंगलवार 4 जुलाई  2023 से सावन मास की शुरूवात हो चुकी है इस वर्ष सावन मास में अधिक मास के जुड़ जाने के साथ ही सावन के कुल सोमवार की संख्या 8 हो गयी है जो कि सामान्य सावन के मुकाबले लगभग दोगुनी है इसी के साथ आपको यह भी बताते चलें कि इस साल सावन के 8 सोमवार के साथ पडने वाले 9 मंगलवार को मंगल गौरी व्रत भी रखा जायेगा जो कि अत्यंत ही गुणकारी सिद्व होता है सावन मास में इस व्रत को रखने से मां पार्वती, मंगला गौरी के रूप में अपने भक्तों पर कृपा बरसाती है।

सावन मास में भगवान शिव की पूजन विधिः

शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव को समर्पित सावन के महीने में ही समुद्र मंथन हुआ था और उस समुद्र मंथन से जो हलाहल विष निकला था, उसका पान भगवान शिव ने किया था इसलिये उस विष को शान्त करने के लिये भक्त इस महीने मे भगवान शिव को जल अर्पित करते हैं। केवल सावन मास में भगवान शिव की पूजा करके पूरे साल की पूजा के बराबर फल पाया जा सकता है। सावन मास में हर सोमवार को व्रत रखना बहुत ही उत्तम माना गया है। हर दिन सुबह शिवलिंग पर जल और बेलपत्र के साथ दूध अर्पित करने के साथ शिव मंत्र का जाप करना सावन महीने में बहुत ही फलदायी माना गया है। इस माह में रूद्रा़क्ष धारण करना बहुत ही उत्तम होता है।

सावन मास में पूजा के लिए शुभ समय:

सावन मास में पूजा के लिए शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 3:56 बजे से सुबह 4ः50 बजे, अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11ः57 बजे से दोपहर 12ः52 बजे तक एवं अमृत काल में दोपहर 11ः59 बजे से रात 1ः30 बजे तक का समय उत्तम माना गया है।

सावन मास में दान करने का महत्व:

शास्त्रों की मान्यताओं के अनुसार सावन में काला तिल, नमक, चावल  एवं चांदी की वस्तुओं को सोमवार के दिन पूरे विधि-विधान से दान करने पर शिव की पूजा और व्रत करने के समान फल प्राप्त होता है  ऐसा माना जाता है कि सावन में सोमवार के दिन शिवलिंग पर गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, भांग, कपूर, दूध, चावल, चंदन एवं रूद्राक्ष आदि चढ़ाने से बहुत ही लाभ प्राप्त होता है। परन्तु शिवलिग पर  कभी भी हल्दी, कुमकुम, तुलसीदल, लाल रंग का फूल एवं शंख से जल नहीं अर्पित करना चाहिए।

सावन मास में ये काम कभी ना करें:

सावन मास में जल की बर्बादी कभी ना करें एवं पत्तेदार चीजों का सेवन एवं तामसिक भोजन जैसे लहसुन, प्याज आदि का सेवन कदापि ना करें।

सावन मास में पंचक का रखें पूरा ध्यानः

किसी भी शुभ काम जैसे हवन, यज्ञ, विशेष पूजा पाठ और मांगलिक कार्य करने से पूर्व पंचक पर जरूर विचार करना चाहिए। जुलाई मास में पंचक सावन के सोमवार पर भी रहेगा । शुभ कार्य को करने हेतु पंचक के 5 दिन वर्जित माने जाते है, पंचक हर महीने में पड़ता है। इस साल जुलाई के महीने में पंचक 6 जुलाई 2023 वृहस्पतिवार को 01ः40 बजे दोपहर से शुरू होकर 10 जुलाई 2023 तक रहेगा। इस वर्ष जुलाई माह के पहले सोमवार और कालाष्टमी व्रत पर पंचक का साया रहेगा। हिन्दू धर्म के अनुसार पंचक में शुभ कार्य नहीं किये जाते हैं परन्तु इस दौरान शिव पूजा में पंचक का कोई असर होता, अतः आप बिना किसी डर के सावन में पूजन एवं व्रत त्यौहार कर सकते हैं।

घर में सुख समृद्वि का आगमनः

सावन का पवित्र महीना मंगलवार 4 जुलाई 2023 से शुरू हो रहा है। भगवान शिव के इस प्रिय माह में वास्तु के अनुसार घर पर कुछ शुभ पौधों को भी लगाकर महादेव को प्रसन्न करके दोगुना फल प्राप्त कर सकते हैं एवं इस से आपका भाग्य भी बदल सकता है। इन पौधों में तुलसी एवं बेल के पौधे को लगाना सर्वोत्तम माना गया है। इन पौधों में कोई वास्तु दोष नहीं होता है। वैसे तो भगवान शिव की पूजा में तुलसी चढ़ाना वर्जित माना जाता है। परन्तु सावन के इस पवित्र माह में तुलसी का पौधा लगाना और उस पर प्रतिदिन जल चढाने से सुख समृद्वि आती हैै। सावन में चांदी की वस्तुओं का दान पूर्ण विधि विधान से करने पर संतान प्राप्ति का सुख प्राप्त होता है।

सावन के महीने में शिव की पूजा से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस माह में अगर आप शमी के पेड़ की जड़ भोलेनाथ पर चढाते है और इसके बाद उस जड़ को अपनी तिजोरी में रखते है, तो ऐसा माना जाता है कि आपकी जिन्दगी में चल रहा संकट खत्म हो सकता है। यह एक मान्यता मात्र है।

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Source: aajtak.in , abpnews.in