Chhath Vrat 2023: महापर्व छठ 2023 पर पूजा के नियम और विधान, जानिये किन किन सामग्रियों का उपयोग करें

Chhath Puja 2023

Chhath Vrat 2023: महापर्व छठ 2023 पर पूजा के नियम और विधान, जानिये किन किन सामग्रियों का उपयोग करें

दोस्तों छठ पूजा हर साल कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है। चार दिनों तक चलने वाला यह त्योहार बिहार और पूर्वांचल के लोगों के लिये बेहद खास होता है। छठ की शुरूवात नहाई खाई के साथ होती है। छठ पूजा का व्रत करने वाले लोग लगातार 36 घंटे तक बिना कुछ खाये पीये निर्जला उपवास करते हैं। छठ व्रत के दौरान कई कड़े नियम भी होते हैं जिनका पालन करना बेहद जरूरी होता है नहीं तो ऐसा माना जाता है कि छठी मैया नाराज हो सकती हैं। ऐसे में आइये जानते हैं कि छठ पूजा में किन बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना आवश्यक होता है और भूलकर भी उन्हें नहीं करना चाहिये।

आप सभी को बता दें कि छठ का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण व्रत होता है और इस व्रत का पालन बहुत ही शुद्वता के साथ किया जाता है। क्यों कि इस व्रत में हम सूर्य को प्रणाम करते हैं। यही एक मात्र व्रत है जहाँ पर अस्त होते हुये सूर्य की भी पूजा होती है। आपने देखा होगा कि सामान्यतः इस संसार का नियम है, कि उपर उठते हुये लोगों को तो सभी लोग प्रणाम करते है, लेकिन जिसके जीवन में ढ़लान की परिस्थिति होती है उसको इस संसार में कोई प्रणाम नही करता है। तो ये व्रत आपको यह भी सिखाता है कि अगर कोई भी व्यक्ति आपके जीवन में कुछ भी काम आया है, या फिर आपने जिससे भी कुछ भी प्राप्त किया है, उसके खराब समय में, या उसके जीवन की ढ़लान की परिस्थितियों में भी, आपको उस व्यक्ति को उतना ही सम्मान देना है जितना कि पहले था।

Chhath Vrat 2023: सभी को मिलकर सूर्य को प्रणाम करना चाहिये

छठ का यह व्रत हमें बहुत कुछ सिखाता है, यह अपनी मनोकामनाओं को पूर्ण करने का व्रत है। आप सभी को पता होगा कि हमारे भारत की यह विविधता है कि कोई भी पर्व भारत में कहीं भी मनाया जाता है तो हम सभी लोग उसको मिलकर मनाते हैं। आपने देखा भी होगा कि दीपावली का सुन्दर त्योहार लगभग पूरे विश्व में ही मनाया जाने लगा है या यूँ कहें कि पूरे विश्व में लोग दीपावली का त्योहार मनाने के लिये तैयार हो रहे हैं। तो ऐसी परिस्थिति के अन्तर्गत अगर आप इस छठ के व्रत को करते हैं या नहीं भी करते हैं तो भी आपको सूर्य को नमस्कार करना बहुत ही आवश्यक होता है। इसलिये आपको भी श्रद्वापूर्वक हाथ जोड़कर छठी मैया को प्रणाम करना चाहिये, सूर्य को प्रणाम करना चाहिये और यह प्रार्थना करें कि हे छठी मैया आप हमारे उपर अपनी कृपा बनाये रखें और हमारी सभी मनोकामनाओ को पूर्ण करें।

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Chhath Vrat 2023: क्या है अर्ध्य और पूजा का शुभ मुहूर्तः

अगर हम मुहूर्त की बात करते हैं तो हमको सबसे पहले भगवान राम के द्वारा कही गयी इस चैपाई को याद करना चाहिये। जो इस छठ के व्रत के लिये बहुत ही खास होती है-

निर्मल मन जन सो मोहि पावा।
मोहि कपट छल छिद्र न भावा।।

दोस्तों आपकी जानकारी के लिये बता दें कि बाकी सभी व्रतों और पूजाओं में की गयी गलतियाँ शायद माफ होती हैं, परन्तु यही एक ऐसा कठिनतम व्रत है, जिसमें कोई भी गलती स्वीकार्य नहीं होती है। अगर इस व्रत के मुहूर्त की बात करें तो सामान्यतः चतुर्थी तिथि से प्रारंभ होने वाला यह व्रत नहाई-खाई से प्रारंभ होता है और फिर खरना और उसके बाद सजिया अर्ध्य, भोरवा अर्ध्य होता है। तो अगर हम सबसे पहले दिन की बात करते है, जिसको हम नहाई खाई भी कहते हैं जिस दिन अपने आप को इस कठिनतम व्रत के लिये तैयार करना है, सामान्यतः इसी दिन से इस व्रत का प्रारंभ हो जाता है, तो उसके शुभ मुहूर्त के लिये सुबह 05ः30 बजे से लेकर 06ः45 बजे तक का समय एक शुभ संयोग बन रहा है। जिस समय पर पूजन करना आपके लिये अति उत्तम होगा। बाकी अगर हम बात करें तो इस व्रत में लोगों के अपने घर के कुछ नियम होते हैं, उसके अनुसार भी पूजा की जाती है। इसमें सामान्यतः ऐसा देखा जाता है कि जब भी हम छठ पूजा की बात करते हैं, तो लोग मुहूर्त को लेकर ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं क्योंकि अस्त होते हुये सूर्य को अर्ध्य देना होता है तो समय से पहले भी जल में खड़े होकर पूजा प्रारंभ की जा सकती है। और अगर प्रातः सूर्य के अर्ध्य की बात करें, तो कई बार लोग रात्रि के 03ः00 बजे से ही जल में खड़े होकर पूजा का प्रारंभ कर देते हैं। लेकिन हम यहाँ पर जिस मुहूर्त की बात कर रहे हैं, इस समय पर की गयी प्रार्थना आपके लिये विशेष लाभप्रद हो सकती है।

Chhath Vrat 2023: 19.11.2023 को है सजिया अर्ध्य

दूसरा अगर हम खरना के मुहूर्त की बात करते हैं, तो सुबह 06ः00 बजे से लेकर 06ः50 तक का समय उत्तम माना गया है। और शाम का 05ः00 बजे से लेकर 06ः20 बजे तक का समय खरना की पूजा के लिये बहुत ही विशिष्ट समय होगा।
अगर हम सजिया अर्ध्य की बात करें जो कि 19.11.2023 का एक विशेष पर्व है, इसमें संध्या के अर्ध्य के लिये आपको बता दें कि सामान्यतः सूर्य के अस्त होने का समय अलग अलग स्थान के हिसाब से थोड़ा परिवर्तित हो सकता है, इसलिये 19 तारीख को शाम 05ः00 बजे से 06ः10 बजे तक का समय अर्ध्य देने का उत्तम समय होगा, इसी के बीच में अलग अलग स्थानों पर सूर्य अस्त होगा। आप इस समय के पहले से भी पूजा प्रारंभ कर सकते है या फिर इस मुहूर्त के बाद तक भी प्रार्थना कर सकते हैं। ये आपकी श्रद्वा पर निर्भर करता है। लेकिन शाम 05ः00 बजे से लेकर 06ः20 बजे तक का समय एक महत्वपूर्ण समय है, जिसमें की गयी प्रार्थना बहत की फलीभूत हो सकती है।

अगर भोरवा अर्ध्य की बात करें, जो कि 20.11.2023 को है, इसमें अगर आप देखेंगे तो कई लोग तो 19 तारीख की रात्रि से ही जल में खड़े रहते हैं और 20 तारीख की सुबह में पूजा करके पानी से बाहर निकलते हैं। आपको बता दें कि 20 नवम्बर 2023 को सुबह का अर्ध्य है। तो अगर हम 20 तारीख की सुबह के अर्ध्य के शुभ मुहूर्त की बात करें तो प्रातःकाल 06ः00 बजे से लेकर 06ः52 बजे तक का समय उत्तम होगा।

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Chhath Vrat 2023: पूजा के लिये सूप में क्या क्या सामग्री रखना चाहियेः

आप सभी को बता दें कि छठ का व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण व्रत होता है और इस व्रत का पालन बहुत ही शुद्वता के साथ किया जाता है। ऐसे में आप सूप में ताम्र पात्र जैसे तांबे के लोटे का प्रयोग करें, फूल, फल और चावल को विशेष रूप से रखना चाहिये। चावल के लड्डू, पुआ, ठेकुआ जैसे मिष्ठानों को रखना चाहिये। काले चने और कच्चे चावल का प्रयोग करना चाहिये। तिलक के लिये सिन्दूर का रखा जाना अनिवार्य है। बड़े साइज के नींबू और गन्ने को पत्ते सहित रखने का भी विधान है। इसके साथ साथ दीप को भी रखना चाहिये। अगर हो सके तो एक हाथी बनाकर जरूर रखें, जो भगवान गणेश का प्रतीक माना जाता है। हल्दी और अदरक भी रखने का नियम है। साथ ही आपको बता दें कि इस पूजा के अन्तर्गत तीन सूप रखने का भी नियम है। सारी सामग्रियों को रखने के लिये टोकरी बांस की बनी होनी चाहिये। इस पूजा में ऋतु फल को लेने का भी नियम है, इसलिये हो सके तो पूजा के समय की ऋतु में जो भी फल होते हैं, उन्हीं फलों का प्रयोग करें। इस हिसाब से देखा जाये तो ये एक प्रकृति की भी पूजा है। बाकी आप अपनी सुविधानुसार अगर आपके पास सारी सामग्रियाँ नहीं उपलब्ध हो पा रही हैं तो भी आप शुद्व मन से अगर जल का भी अर्पण सूर्य भगवान को करते हैं, तो ये भी आपके लिये लाभप्रद होगा।

Chhath Vrat 2023: पूजन के लिये किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहियेः

आपको सबसे पहले बता दें, कि पूजन के लिये सबसे महत्पूर्ण आपके मन की निर्मलता होती है, मन में किसी प्रकार का क्लेश नहीं रखना चाहिये। खास करके छठी के रूप मे हम सूर्य भगवान की पूजा करते हैं, और आपने यह भी देखा होगा कि सूर्य की कृपा सभी के उपर एक समान होती है, उसमें किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं होता है। इसलिये सबसे महत्वपूर्ण बात है कि इस पूजा को करते समय किसी प्रकार का भेदभाव या कोई कपट मन में नहीं रखना चाहिये।

Chhath Vrat 2023: छठ पूजा को करते समय किसी भी प्रकार के प्लास्टिक का प्रयोग ना करेः

इस पूजा में किसी प्रकार के प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करना चाहिये, शास्त्रों के विधान के अनुसार अगर देखा जाये तो स्टील के बर्तनों का भी प्रयोग वर्जित किया गया है। इसलिये अगर हो सके तो सिर्फ ताम्रपात्र का ही प्रयोग करें और सूप में सभी सामग्रियों को रखें। इस व्रत में नहाय खाय में विशेष रूप से घिया की सब्जी बनानी चाहिये। इस समय में मांसाहार आदि चाजों को पूरी तरह से अपने से दूर कर देना चाहिये। साथ ही सभी नशीले पदार्थों को पूरी तरह से वर्जित कर देना चाहिये। पूरी श्रद्वा के साथ बिना मसाले के प्रयोग से बनी घिया की सब्जी, उबले चने और चावल का प्रयोग नहाय खाय के दिन करना चाहिये।

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Chhath Vrat 2023: क्या है छठ पूजा के पीछे की कथा और उसका महत्वः

ऐसा माना जाता है, कि आदि शक्ति माता जगदम्बा ने सबसे पहले इस व्रत को प्रारम्भ करके इसका पालन किया था। जब भगवान राम और रावण के युद्व का समय चल रहा था और जब एक बार ऐसी परिस्थिति आ गयी थी जिसमें यह प्रतीत हो रहा था कि रावण विजय प्राप्ति की तरफ अग्रसर हो रहा है। वहाँ पर फिर भगवान राम में कहा था कि हमने बिना आदि शक्ति की आराधना किये ही युद्व का प्रारम्भ किया है। इसलिये ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आज रावण अकेले नहीं बल्कि उसके साथ कोई शक्ति युद्व कर रही थी और फिर यहीं से भगवान राम ने नव दुर्गा की आराधना करना प्रारम्भ किया और यहीं पर आदित्य हृदय स्त्रोत के अनुसार ऋषि मुनियों ने भगवान राम को समुद्र किनारे पूर्ण विधि विधान के साथ सूर्य की पूजा भी करायी और उसी समय इस पूजन को आदि शक्ति माता जानकी ने लंका में रहकर किया और तभी से नवरात्रि पूजा का भी विधान शुरू हुआ है।

Chhath Vrat 2023: छठ व्रत के समय किसी भी प्रकार की गलती होने पर क्या करेंः

शास्त्रों के अनुसार प्रत्येक जीव के अन्दर भगवान के स्वरूप का वास होता है, तो अगर पूजा के नियमों का पालन करते समय अनजाने में किसी प्रकार की भूल हो जाती है तो उसकी क्षमा याचना करते हुये पूजन को आगे बढ़ाना चाहिये। अनजाने में हुयी गलतियों को भगवान सदैव माफ करते है।

इस प्रकार से हमने ये समझा कि छठ पूजा में किन किन बातों को ध्यान में रखना चाहिये और किस तरीके से इस महान पर्व को मनाना चाहिये। आपको सभी को श्रद्वापूर्वक हाथ जोड़कर छठी मैया को प्रणाम करना चाहिये, सूर्य को प्रणाम करना चाहिये और यह प्रार्थना करे कि हे छठी मैया आप हमारे उपर अपनी कृपा बनाये रखें और हमारी सभी मनोकामनाओ को पूर्ण करें। धन्यवाद!

Source: News State

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Ram Mandir Construction Ayodhya: राम मंदिर गर्भगृह के निर्माण की खास तस्वीरें आयी सामने

Ram Mandir Construction AyodhyaRam Mandir Construction Ayodhya: राम मंदिर गर्भगृह के निर्माण की खास तस्वीरें आयी सामने

सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण कार्य जोरों से चल रहा है। कोर्ट के आदेश के बाद मंदिर निर्माण कार्याें को पूरा करने हेतु गठित किये गये ट्रस्ट के द्वारा मंदिर निर्माण के कायदों और नियमों को तय करने के बाद मंदिर का निर्माण कार्य प्रारंभ किया गया। ऐसे में इस समय सभी के मन में से जिज्ञासा जरूर है कि इस भव्य राम मंदिर का गर्भ गृह कैसा होगा। श्रद्वालुओं की इसी जिज्ञासा को कम करने के लिये मंदिर ट्रस्ट की तरफ से श्रीराम मंदिर की कुछ तस्वीरें शेयर की गयी है एवं साथ ही यह भी बताया गया है कि तय समय के अनुसार साल 2024 में मकर संक्रान्ति के शुभ अवसर पर श्रीराम मंदिर के गर्भगृह में राम लला को विराजमान किया जायेगा।

Ram Mandir Construction Ayodhya

Ram Mandir Construction Ayodhya: कब तक बनकर तैयार होगा राम मंदिर

त्रिपुरा में एक सार्वजनिक रैली को संबोधित करते हुये केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने गुरूवार को यह ऐलान कर दिया है कि अयोध्या में बन रहा भव्य राम मंदिर 1 जनवरी 2024 तक बनकर तैयार हो जायेगा। केन्द्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि कोर्ट में जब मंदिर को लेकर सुनवाई चल रही थी तो उस समय कांग्रेस ने मंदिर निर्माण के पक्ष में फैसला ना दिये जाने को लेकर बाधायें भी उत्पन्न की थी। लेकिन एक लम्बी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी विवादित जगह को भगवान राम का जन्म स्थान मानते हुये मंदिर निर्माण के पक्ष में फैसला सुनाया था। ऐसा माना जा रहा है कि 2024 में लोकसभा चुनाव के पहले राम मंदिर का उद्घाटन करने से बीजेपी के लिये एक बार पुनः सत्ता में बने रहने की लड़ाई आसान हो जायेगी

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Ram Mandir Construction Ayodhya: भव्य मंदिर का निर्माण कार्य जोरों पर

रिपोर्टस के मुताबिक इस भव्य मंदिर के कार्य को तेजी से पूरा करने के लिये मजदूरों की संख्या बढ़ा दी गयी है। मंदिर निर्माण हेतु गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट ने रविवार को मंदिर निर्माण से संबंधित कई सारे पहलुओं से परदा उठाया। ट्रस्ट के महासचिव श्री चंपत राय ने बताया कि राम जन्मभूमि के परिसर में हिन्दू धर्म से जुड़ी सभी महान विभूतियों और साधु-संतों की प्रतिमाओं को भी सम्मान सहित स्थान दिया जायेगा। मंदिर की भव्यता में चार चाँद लगाने के लिये राजस्थान से ग्रेनाइट और पिंक सैंड स्टोन मंगवाये गये है। जिसको परिसर में जगह जगह पर लगाये जाने कार्य चल रहा है।

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Ram Mandir Construction Ayodhya

Ram Mandir Construction Ayodhya: गर्भगृह की तस्वीरें

मंदिर ट्रस्ट की तरफ से श्रीराम मंदिर निर्माण की कुछ तस्वीरें शेयर की गयी है जिसमें मंदिर में प्रस्तावित गर्भगृह को भी दिखाया गया है जो अगले कुछ महीनों में बनकर तैयार हो जायेगा। बताया गया है कि रामपथ, जन्मभूमि पथ और भक्तिपथ को विकसित करने का काम बहुत तेजी से चल रहा है।

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Ram Mandir Construction Ayodhya: कितने रूपयों में बनकर तैयार होगा मंदिर

मंदिर निर्माण हेतु गठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव श्री चंपत राय ने बताया कि विशेषज्ञों की रिपोर्ट एवं ट्रस्ट के अनुमान के आधार पर मंदिर निर्माण में 1800 करोड़ रूपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।

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Rakshabandhan 2023: महिलाओं के लिये योगी जी का खास तोहफा

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Rakshabandhan 2023: महिलाओं के लिये योगी जी का खास तोहफा

भारतीय हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन बांधने का उचित समय 30 अगस्त की रात्रि 9 बजकर 5 मिनट से लेकर 31 अगस्त की सुबह 7 बजे तक होगा।

Rakshabandhan 2023: मुफ्त बस यात्रा का तोहफा

इस समय देश में रक्षाबंधन त्योहार को लेकर जगह-जगह पर राखी की दुकानों से बाजार सज चुके हैं। सभी बहनें अपनी पसन्द की राखी की खरीदारी कर रही हैं। ऐसे में इस रक्षाबंधन के त्योहार पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी ने प्रदेश की महिलाओं को एक बार पुनः मुफ्त बस यात्रा का तोहफा दिया है। मुख्यमंत्री नें प्रदेश भर में यूपी की रोडवेज बसों और सिटी बसों में 29 अगस्त रात 12 बजे से 31 अगस्त की रात 12 बजे तक मुफ्त बस यात्रा सेवा देने का आदेश जारी किया है। इस निश्चित समय में प्रदेश में कहीं पर भी आने जाने के लिये महिलाओं को यूपी की रोडवेज बसों और सिटी बसों में किसी भी किराये को देने की जरूरत नहीं है।

Happy Rakshabandhan 2023

Rakshabandhan 2023: परिवहन निगम और नगरीय परिवहन निदेशालय की ओर से निर्देश जारी

मुख्यमंत्री के आदेश के बाद तुरंत परिवहन निगम और नगरीय परिवहन निदेशालय की ओर से निर्देश भी जारी कर दिया गया है। इस आदेश में बताया गया है कि पिछले वर्ष की भांति ही इस वर्ष भी रक्षाबंधन के पर्व पर परिवहन निगम की सभी बसों में महिलाओं को 29 अगस्त रात 12 बजे से 31 अगस्त की रात 12 बजे तक प्रदेश में कहीं भी भ्रमण करने हेतु टिकट लेने की जरूरत नहीं है।

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Rakshabandhan 2023: कब है रक्षाबंधन 30 या 31 अगस्त कोः

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Rakshabandhan 2023: कब है रक्षाबंधन 30 या 31 अगस्त कोः

सावन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को हर साल रक्षाबन्धन का त्योहार मनाया जाता है। इस पावन दिन पर सभी बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उनके लम्बी उम्र की कामना करती हैं। इसी कारण से इस त्योहार को भाई और बहन का त्योहार भी माना जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार इस साल 2023 में रक्षाबंधन के दिन पंचक लगने के साथ भद्रा काल भी है। ऐसी परिस्थिति में आप लोगों के मन में यह दुविधा जरूर होगी कि आखिर रक्षाबंधन का पावन पर्व कब मनाया जाय, वो कौन सा शुभ समय होगा जब बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उनके उज्जवल भविष्य की कामना करेंगी। 30 या 31 अगस्त, आखिर कब रक्षाबंधन का पर्व मनाना उचित होगा ।

Rakshabandhan 2023:  शुभ मुहूर्त में पंचक एवं भद्राकाल:

आइये बताते हैैं आपको रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार मनाने की सही तिथि एवं उचित समय। भारतीय हिन्दू पंचांग के अनुसार सावन मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 30 अगस्त सुबह 11 बजे से शुरू होगी और 31 अगस्त की सुबह 07 बजकर 5 मिनट तक रहेगी। परन्तु इस दिन भद्राकाल लगने के कारण भद्रा के समय रक्षाबंधन बाँधना उचित नहीं माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार रावण की बहन शुपर्णखा ने रावण को भद्राकाल के दौरान राखी बांधी थी और रावण का सर्वनाश हो गया था। इसलिये रक्षाबंधन बाँधने का उचित समय भद्राकाल के समाप्त होने के बाद का होगा।

Rakshabandhan 2023

Rakshabandhan 2023: सही तिथि एवं शुभ मुहूर्त:

इस समय देश में रक्षाबंधन त्योहार को लेकर जगह-जगह पर राखी की दुकानों से बाजार सज चुके हैं। सभी बहनें अपनी पसन्द की राखी की खरीदारी कर रही हैं।

इस वर्ष 2023 में रक्षाबंधन का त्योहार मनाने का एवं अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने की सही तिथि एवं समय भद्राकाल समाप्त होने के बाद 30 अगस्त की रात्रि 9 बजकर 5 मिनट से लेकर 31 अगस्त की सुबह 7 बजे तक होगा। वैसे कई मान्यताओं के अनुसार रात्रि के समय राखी नहीं बांधी जाती है। इसलिये सभी बहनों के लिये अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने का उचित समय 31 अगस्त की सुबह 7 बजे से पहले का होगा।

Source: Hindu Panchang

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Rakshabandhan 2023 Date & Time: रक्षाबंधन 2023 के बारे में सारी जानकारी

इस साल 2023 में अगस्त में सावन के साथ-साथ अधिक मास का संयोग बना हुआ है। इस साल सावन पूरे दो महीने का है। जो 4जुलाई से शुरू होकर 31 अगस्त तक चलेगा। इस वर्ष सावन के दो महीने तक चलने का मुख्य कारण यह है कि इस साल अधिकमास भी लगा हुआ है। आपको यह भी बता दें कि सावन के साथ वाले अधिकमास में भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु की भी पूजा करना बहुत ही फलदायी सिद्व होता है।

Rakshabandhan 2023 Date & Time: व्रत एवं त्यौहारः

अगस्त का महीना व्रत एवं त्यौहार में बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है और इस बार तो अगस्त माह की शुरूआत अधिकमास की पूर्णिमा के साथ हुयी है।

1 अगस्त 2023 अधिकमास पूर्णिमा व्रत, मंगला गौरी व्रत
2 अगस्त 2023 पंचक शुरू
7 अगस्त 2023 सावन सोमवार
8 अगस्त 2023 मंगला गौरी व्रत, कालाष्टमी
12 अगस्त 2023  पुरुषोत्तम एकादशी
14 अगस्त 2023 अधिकमास मासिक शिवरात्रि, सावन सोमवार
15 अगस्त 2023 मंगला गौरी व्रत
19 अगस्त 2023 हरियाली तीज
21 अगस्त 2023 नाग पंचमी
30 अगस्त 2023 रक्षाबंधन Rakshabandhan
31 अगस्त 2023 सावन पूर्णिमा व्रत

Rakshabandhan 2023 Date & Time: रक्षाबंधन 2023 के बारे में सारी जानकारी

रक्षाबंधन (Rakshabandhan)  एक प्राचीन हिंदू त्योहार है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर साल सावन के महीने में पूर्णिमा तिथि पर रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई में रक्षासूत्र बांधकर उनकी लंबी आयु की कामना करती हैं। वहीं भाई रक्षा धागे को बंधवा कर अपनी बहन को उम्र भर रक्षा करने का वचन देते हैं। लेकिन इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व दो दिन मनाया जायेगा।

Rakshabandhan 2023 Date & Time:  शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन के दिन भद्रा की वजह से राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 30 अगस्त की रात्रि 9 बजकर 5 मिनट से लेकर 31 अगस्त की सुबह 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगा।

Rakshabandhan 2023 Date & Time:  रक्षाबंधन का पौराणिक महत्वः

रक्षा बंधन की उत्पत्ति का पता प्राचीन काल से लगाया जा सकता है। इस त्योहार का संदर्भ 326 ईसा पूर्व की सिकंदर महान से संबंधित किंवदंतियों में पाया जा सकता है।

हिंदू धर्मग्रंथों में भी रक्षा बंधन के कई वृत्तांत हैं:

ऐसी ही एक कहानी में इंद्र की पत्नी शची ने शक्तिशाली राक्षस राजा बाली के खिलाफ लड़ाई के दौरान इंद्र की रक्षा के लिए उनकी कलाई पर एक धागा बांधा था। यह कहानी बताती है कि प्राचीन भारत में संभवतः पवित्र धागों का उपयोग किया जाता था, जो युद्ध में जाने वाले पुरुषों को सुरक्षा प्रदान करते थे, और केवल भाई.बहन के रिश्ते तक ही सीमित नहीं थे।

भागवत पुराण और विष्णु पुराण की एक अन्य कथा में बताया गया है कि कैसे राजा बलि ने यज्ञ द्वारा तीनों लोकों पर विजय प्राप्त कर ली, इस पर इन्द्र द्वारा भगवान विष्णु से प्रार्थना किये जाने पर भगवान विष्णु ने वामन का रूप धारण करके राजा बलि से भिक्षा मांगी, इस पर गुरू के बार बार मना करने के बावजूद भी राजा बलि ने वामन को तीन पग भूमि दान में दे दी थी और इसके बाद भगवान विष्णु ने उस तीन पग भूमि में तीनो लोक को नापकर इन्द्र को सौंप दिया और राजा बलि के पास कुछ भी नहीं बचा। इस पर राजा बलि ने विष्णु से अपने महल में रहने का अनुरोध किया। विष्णु की पत्नी अर्थात देवी लक्ष्मी, इस व्यवस्था को अस्वीकार करती हैं और राजा बलि को राखी बांधती हैं, जिससे वह उनका भाई बन जाता है। इस भाव से प्रभावित होकर, राजा बलि ने उनकी इच्छा पूरी की, और देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से घर लौटने के लिए कहा।

अगस्त माह में नागपंचमी का त्यौहारः

सावन में शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली पंचमी तिथि को हर साल नागपंचती का त्यौहार बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस वर्ष नागपंचमी का त्यौहार 21 अगस्त को मनाया जायेगा। भगवान शिव के साथ साथ इस दिन नाग देवता की भी पूजा ही जाती है एवं नाग देवता को दूध भी पिलाने की मान्यता है।

यहां पर उपलब्ध करायी गयी सभी सूचनाएं सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है, यहां यह बताना जरूरी है कि nayaujalanews.com किसी भी तरह की मान्यता या जानकारी की पुष्टि नहीं करता है। किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें।

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Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023 : क्या है अधिक मास और सावन सोमवार का महत्वः

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023 : क्या है अधिक मास और सावन सोमवार का महत्वः

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: कब लगता है अधिक मास

अंग्रेजी कैलेंडर में तो हर साल 12 महीने होते हैं लेकिन हिन्दू पंचांग के अनुसार हर 3 साल में एक बार एक अतिरिक्त मास होता है जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। हिंदू पंचांग सूर्य और चंद्रमा वर्ष की गणना से चलता है। अधिक मास चंद्रमा साल का अतिरिक्त भाग है जो कि 32 माह 16 दिन और 8 घंटों के अंतर में बनता है। सूर्य और चंद्रमा वर्ष के बीच इस अंतर को पाटने या संतुलन बनाने के लिए अधिक मास लगता है।
Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023 में गणना के अनुसार सूर्य वर्ष में 365 दिन होते हैं और चंद्रमा वर्ष में 354 दिन होते हैं । इस तरह में 1 साल में चंद्रमा और सूर्य वर्ष में 11 दिनों का अंतर होता है और 3 साल में अंतर 33 दिनों का हो जाता है। यही 33 दिन की सीमा में जुड़ जाता है जिसे अधिक मास का नाम दिया गया है।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: क्या है अधिक मास का पौराणिक आधार

अधिक मास से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार एक बार राजा हिरणकश्यप ने कठोर तप से ब्रह्माजी को प्रसन किया और उनसे वरदान अमरत्व का मांगा लेकिन अमृता का वरदान निषेध है इसलिए ब्रह्माजी ने उसे कोई और वर मांगने को कहा तब हिरणकश्यप ने ब्रह्माजी से कहा कि आप ऐसा वरदान दीजिए जिसमें संसार का कोई नर पशु पक्षी देवता या असुर हमें मार ना सके और उसे वर्ष के सभी 12 महीने में भी मृत्यु प्राप्त ना हो उसकी मृत्यु ना दिन का समय हो ना रात का हो वह ना ही किसी अस्त्र से मरे ना किसी शस्त्र से मरे उसे ना घर में मारा जा सके और ना ही घर से बाहर। ब्रह्माजी ने उसे ऐसा ही वरदान दे दिया लेकिन इस वरदान के मिलते ही हिरणकश्यप स्वयं को अमर और भगवान समान मानने लगा तब भगवान विष्णु ने अधिक मास में नरसिंह अवतार धारण कर आधा पुरुष और आधे शेर के रूप में प्रकट हुए और शाम के समय देहरी के नीचे अपने नाखूनों से हिरण्यकश्यप का सीना चीरकर उसे मृत्यु के द्वार भेजकर उसके जीवन का अंत किये। इस से यह भी मान्यता है कि इस मास में कुकृत्य करने वाले को भगवान विष्णु अवश्य सजा देते हैं।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: अधिक मास कितने वर्ष के अंतराल पर आता है आइए जानते हैं:

हिंदू पंचांग एवं सनातन धर्म के अनुसार हर 3  साल में एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाता है जिसे अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास के रूप में जाना जाता है । सनातन धर्म एवं वैदिक काल रीति रिवाज से हम सब पुरुषोत्तम मास को मनाते चले आ रहे है इस साल सूर्य वर्ष  365 दिन और  6 घंटे का होता है वही चंद्रवर्ष 354 दिन का माना जाता है।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: कितने वर्ष पहले सावन में मलमास पड़ा था

मलमास या पुरुषोत्तम मास सावन के महीने में पिछले बार 19 साल पहले पड़ा था । सन 2004 ईस्वी में सावन 2 महीने का हुआ था । इसके बाद 2023 में सावन मास के महीने में मलमास पड़ा है। भगवान विष्णु अपने मुखारविंद से इस मलमास को अपने नाम से जोड़कर इस मास की महिमा बढ़ा दिये। भगवान विष्णु ने इसका महत्व और गुणगान करते यह भी बताया कि जो व्यक्ति पुरुषोत्तम मास में मेरा नाम जप तप, पूजा पाठ, ध्यान, यज्ञ, अनुष्ठान, ब्राह्मणों द्वारा कराता है या स्वयं करता है उसे अपेक्षाकृत 10 गुना फल की प्राप्ति होती है। ब्राह्मणों को दान पुण्य करना, गरीबों को दान देने, भोजन कराने से इसका भी 10 गुना लाभ प्राप्त होता है।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: अधिक मास में क्या करना चाहिए

अधिक मास में विभिन्न प्रकार के धार्मिक कार्य अनुष्ठान करना चाहिए जैसे उपवास रखना, धार्मिक ग्रंथों को पढ़ना, मंत्र का जाप एवं पाठ करना, प्रार्थना करने के साथ साथ अपने गुरु के द्वारा गुरुदीक्षा के समय दिया हुआ गुरुमंत्र को अधिक से अधिक जाप करना चाहिए और अपने गुरु को ध्यान लगाकर जप करना चाहिए । अपने घर में कुल देवी देवता को ध्यान लगाकर और अपने इष्ट देवी देवता की पूजा करनी चाहिए। सात्विक आहार मधुर वाणी एवं मौन धारण करना चाहिए। विभिन्न अवधि या पूरे दिन के व्रत उपवास अवश्य करना चाहिए। सभी सनातन धर्म के लोगों को अधिक मास के व्रत को करना चाहिए । ऐसा करने से आपके जीवन में सुख समृद्वि बनी रह सकती है। और आपका जीवन सुखमय बन सकता है।
बाबा भोले का विशेष रूप से बाबा का पवित्र माह के सावन महीने में सभी को नियमानुसार व्रत एवं अनुष्ठान दान पूजा पाठ करना एवं कराना चाहिए । इसका 10 गुना लाभ भक्तों को प्राप्त होता है । इस वर्ष 2023 में सावन मास का समय 4 जुलाई से 31 अगस्त तक रहेगा इसे हम अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास के रूप में जानते है। जिस माह में एक अमावस्या से दूसरी अमावस्या के बीच सूर्य की संक्रांति नहीं होती है इसे अधिक मास कहते हैं।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023:  खरवास और मलमास में क्या अंतर है:

हिंदू पंचांग के अनुसार कुछ साल ऐसे होते हैं जिसमें अधिक मास लगता है। अधिक मास लगने के कारण पूर्व त्योहारों की तिथियों में भी अंतर हो जाता है। तो वहीं खरवास लगने पर शुभ मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023 अधिक मास में जन्म का महत्वः

ज्योतिष के अनुसार सावन माह में जन्मे बच्चे बेहद भाग्यशाली होते हैं ।शास्त्रों के अनुसार बताया गया है कि अधिक मास में पैदा हुए बच्चे बहुत भाग्यशाली होते हैं । इनके जन्म मात्र से ही माता पिता का भाग्योदय होता है।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: सावन मास के महीने में चतुर्मास व्रत:

सावन मास के महीने में 4 माह का चतुर्मास व्रत होता है। जो कि इस वर्ष 2023 में अधिक मास होने के कारण 5 माह का चतुर्मास व्रत होगा। चतुर्मास में भगवान विष्णु पूरे 4 माह के लिए योग निद्रा में होते हैं । लेकिन इस साल भगवान विष्णु 5 महीने के लिये क्षीर सागर में शयन करेंगे एवं योग निद्रा में रहेंगे । इस दौरान गृह प्रवेश, मुंडन, विवाह, जनेऊ संस्कार आदि जैसे शुभ मांगलिक कार्य नहीं होता है।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: इस वर्ष सावन में आठ सोमवार व्रत पड़ेगा

सावन महीने में आमतौर पर चार या पांच सोमवार पड़ते हैं। लेकिन 2023 में 8 सावन सोमवार के व्रत होंगे क्योंकि पंचांग के अनुसार श्रावण कृष्ण पक्ष 4 से 17 जुलाई तक है। इसके बाद 18 जुलाई से अधिकमास आरंभ होगा । जो कि 16 अगस्त तक रहेगा, 17 तारीख से सावन का शुक्ल पक्ष शुरू होगा। 31 अगस्त को पूर्णिमा के दिन सावन समाप्त हो जायेगा।

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लेखक एवं मार्गदर्शकः आचार्य श्री गिरजेश्वर चैाबे जी, बनारस

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