Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023 : क्या है अधिक मास और सावन सोमवार का महत्वः

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023 : क्या है अधिक मास और सावन सोमवार का महत्वः

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: कब लगता है अधिक मास

अंग्रेजी कैलेंडर में तो हर साल 12 महीने होते हैं लेकिन हिन्दू पंचांग के अनुसार हर 3 साल में एक बार एक अतिरिक्त मास होता है जिसे अधिक मास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। हिंदू पंचांग सूर्य और चंद्रमा वर्ष की गणना से चलता है। अधिक मास चंद्रमा साल का अतिरिक्त भाग है जो कि 32 माह 16 दिन और 8 घंटों के अंतर में बनता है। सूर्य और चंद्रमा वर्ष के बीच इस अंतर को पाटने या संतुलन बनाने के लिए अधिक मास लगता है।
Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023 में गणना के अनुसार सूर्य वर्ष में 365 दिन होते हैं और चंद्रमा वर्ष में 354 दिन होते हैं । इस तरह में 1 साल में चंद्रमा और सूर्य वर्ष में 11 दिनों का अंतर होता है और 3 साल में अंतर 33 दिनों का हो जाता है। यही 33 दिन की सीमा में जुड़ जाता है जिसे अधिक मास का नाम दिया गया है।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: क्या है अधिक मास का पौराणिक आधार

अधिक मास से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार एक बार राजा हिरणकश्यप ने कठोर तप से ब्रह्माजी को प्रसन किया और उनसे वरदान अमरत्व का मांगा लेकिन अमृता का वरदान निषेध है इसलिए ब्रह्माजी ने उसे कोई और वर मांगने को कहा तब हिरणकश्यप ने ब्रह्माजी से कहा कि आप ऐसा वरदान दीजिए जिसमें संसार का कोई नर पशु पक्षी देवता या असुर हमें मार ना सके और उसे वर्ष के सभी 12 महीने में भी मृत्यु प्राप्त ना हो उसकी मृत्यु ना दिन का समय हो ना रात का हो वह ना ही किसी अस्त्र से मरे ना किसी शस्त्र से मरे उसे ना घर में मारा जा सके और ना ही घर से बाहर। ब्रह्माजी ने उसे ऐसा ही वरदान दे दिया लेकिन इस वरदान के मिलते ही हिरणकश्यप स्वयं को अमर और भगवान समान मानने लगा तब भगवान विष्णु ने अधिक मास में नरसिंह अवतार धारण कर आधा पुरुष और आधे शेर के रूप में प्रकट हुए और शाम के समय देहरी के नीचे अपने नाखूनों से हिरण्यकश्यप का सीना चीरकर उसे मृत्यु के द्वार भेजकर उसके जीवन का अंत किये। इस से यह भी मान्यता है कि इस मास में कुकृत्य करने वाले को भगवान विष्णु अवश्य सजा देते हैं।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: अधिक मास कितने वर्ष के अंतराल पर आता है आइए जानते हैं:

हिंदू पंचांग एवं सनातन धर्म के अनुसार हर 3  साल में एक अतिरिक्त महीना जुड़ जाता है जिसे अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास के रूप में जाना जाता है । सनातन धर्म एवं वैदिक काल रीति रिवाज से हम सब पुरुषोत्तम मास को मनाते चले आ रहे है इस साल सूर्य वर्ष  365 दिन और  6 घंटे का होता है वही चंद्रवर्ष 354 दिन का माना जाता है।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: कितने वर्ष पहले सावन में मलमास पड़ा था

मलमास या पुरुषोत्तम मास सावन के महीने में पिछले बार 19 साल पहले पड़ा था । सन 2004 ईस्वी में सावन 2 महीने का हुआ था । इसके बाद 2023 में सावन मास के महीने में मलमास पड़ा है। भगवान विष्णु अपने मुखारविंद से इस मलमास को अपने नाम से जोड़कर इस मास की महिमा बढ़ा दिये। भगवान विष्णु ने इसका महत्व और गुणगान करते यह भी बताया कि जो व्यक्ति पुरुषोत्तम मास में मेरा नाम जप तप, पूजा पाठ, ध्यान, यज्ञ, अनुष्ठान, ब्राह्मणों द्वारा कराता है या स्वयं करता है उसे अपेक्षाकृत 10 गुना फल की प्राप्ति होती है। ब्राह्मणों को दान पुण्य करना, गरीबों को दान देने, भोजन कराने से इसका भी 10 गुना लाभ प्राप्त होता है।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: अधिक मास में क्या करना चाहिए

अधिक मास में विभिन्न प्रकार के धार्मिक कार्य अनुष्ठान करना चाहिए जैसे उपवास रखना, धार्मिक ग्रंथों को पढ़ना, मंत्र का जाप एवं पाठ करना, प्रार्थना करने के साथ साथ अपने गुरु के द्वारा गुरुदीक्षा के समय दिया हुआ गुरुमंत्र को अधिक से अधिक जाप करना चाहिए और अपने गुरु को ध्यान लगाकर जप करना चाहिए । अपने घर में कुल देवी देवता को ध्यान लगाकर और अपने इष्ट देवी देवता की पूजा करनी चाहिए। सात्विक आहार मधुर वाणी एवं मौन धारण करना चाहिए। विभिन्न अवधि या पूरे दिन के व्रत उपवास अवश्य करना चाहिए। सभी सनातन धर्म के लोगों को अधिक मास के व्रत को करना चाहिए । ऐसा करने से आपके जीवन में सुख समृद्वि बनी रह सकती है। और आपका जीवन सुखमय बन सकता है।
बाबा भोले का विशेष रूप से बाबा का पवित्र माह के सावन महीने में सभी को नियमानुसार व्रत एवं अनुष्ठान दान पूजा पाठ करना एवं कराना चाहिए । इसका 10 गुना लाभ भक्तों को प्राप्त होता है । इस वर्ष 2023 में सावन मास का समय 4 जुलाई से 31 अगस्त तक रहेगा इसे हम अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास के रूप में जानते है। जिस माह में एक अमावस्या से दूसरी अमावस्या के बीच सूर्य की संक्रांति नहीं होती है इसे अधिक मास कहते हैं।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023:  खरवास और मलमास में क्या अंतर है:

हिंदू पंचांग के अनुसार कुछ साल ऐसे होते हैं जिसमें अधिक मास लगता है। अधिक मास लगने के कारण पूर्व त्योहारों की तिथियों में भी अंतर हो जाता है। तो वहीं खरवास लगने पर शुभ मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023 अधिक मास में जन्म का महत्वः

ज्योतिष के अनुसार सावन माह में जन्मे बच्चे बेहद भाग्यशाली होते हैं ।शास्त्रों के अनुसार बताया गया है कि अधिक मास में पैदा हुए बच्चे बहुत भाग्यशाली होते हैं । इनके जन्म मात्र से ही माता पिता का भाग्योदय होता है।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: सावन मास के महीने में चतुर्मास व्रत:

सावन मास के महीने में 4 माह का चतुर्मास व्रत होता है। जो कि इस वर्ष 2023 में अधिक मास होने के कारण 5 माह का चतुर्मास व्रत होगा। चतुर्मास में भगवान विष्णु पूरे 4 माह के लिए योग निद्रा में होते हैं । लेकिन इस साल भगवान विष्णु 5 महीने के लिये क्षीर सागर में शयन करेंगे एवं योग निद्रा में रहेंगे । इस दौरान गृह प्रवेश, मुंडन, विवाह, जनेऊ संस्कार आदि जैसे शुभ मांगलिक कार्य नहीं होता है।

Adhik Mas Sawan Somwar Vrat 2023: इस वर्ष सावन में आठ सोमवार व्रत पड़ेगा

सावन महीने में आमतौर पर चार या पांच सोमवार पड़ते हैं। लेकिन 2023 में 8 सावन सोमवार के व्रत होंगे क्योंकि पंचांग के अनुसार श्रावण कृष्ण पक्ष 4 से 17 जुलाई तक है। इसके बाद 18 जुलाई से अधिकमास आरंभ होगा । जो कि 16 अगस्त तक रहेगा, 17 तारीख से सावन का शुक्ल पक्ष शुरू होगा। 31 अगस्त को पूर्णिमा के दिन सावन समाप्त हो जायेगा।

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लेखक एवं मार्गदर्शकः आचार्य श्री गिरजेश्वर चैाबे जी, बनारस

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